
बिलासपुर। नौणी पंचायत के अंतर्गत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मंडी-माणवां में चिकित्सक की सेवाएं स्थाई रूप से उपलब्ध न होने से लोग भड़क उठे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सैकड़ों लोग इस अस्पताल पर निर्भर हैं। इसके बावजूद चिकित्सक की ड्यूटी आए दिन दूसरी जगह लगा दी जाती है। उन्होंने चेताया कि यदि समस्या के समाधान के लिए समय रहते ठोस कदम न उठाए गए तो वे सीएमओ का घेराव करने पर मजबूर होंगे।
नौणी पंचायत प्रधान राजकुमार, उप प्रधान इकबाल खान तथा ग्रामीणों हरीश चंद, रोशनदीन, शकूर मोहम्मद, हेमचंद, रफी मोहम्मद, श्याम लाल, चमनलाल, मालीराम, अकबर खान व रफीक मोहम्मद आदि ने कहा कि भाखड़ा विस्थापित बहुल इस क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए मंडी-माणवां में करीब चार दशक पूर्व पीएचसी खोली गई थी। एक दशक से भी अधिक अरसा पहले इसका अपना भवन बन चुका है। इसके बावजूद अस्पताल में बीते लंबे समय से चिकित्सक की सेवाएं स्थाई रूप से नहीं मिल रही हैं। डाक्टर की ड्यूटी अन्यत्र लगाने से वह महीने भर में मुश्किल से 10-12 दिन ही मंडी-माणवां में लोगों की नब्ज टटोल पाते हैं।
पंचायत प्रतिनिधियों व ग्रामीणों के अनुसार पीएचसी में चिकित्सक स्थाई रूप से उपलब्ध न होने से लोगों को अत्यधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आपात स्थिति में मरीजों को आनन-फानन में जिला अस्पताल पहुंचाना पड़ता है। सरकार व विभाग को समस्या से कई बार अवगत कराया गया, लेकिन स्थिति जस की तस है। जल्द उचित कदम न उठाए गए तो लोग सीएमओ का घेराव करेंगे। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. एमएल कौशल ने कहा कि जिला अस्पताल में डाक्टरों की कमी चल रही है। मंडी-माणवां में कार्यरत चिकित्सक को आईसीएमआर प्रोजेक्ट का प्रभारी भी बनाया गया है। इसके चलते वह सप्ताह में तीन दिन जिला अस्पताल, जबकि तीन दिन मंडी-माणवां पीएचसी में सेवाएं दे रहे हैं।
